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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल

  • Dec 3, 2022
  • 1 min read


ये ज़ुल्फ़ अगर खुल कर बिखर जाए तो अच्छा

इस रात की तक़दीर सवार जाये तो अच्छा

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है

बाकि भी उसी तरह गुजर जाये तो अच्छा

दुनिया की निगाहो मे क्या अच्छा क्या बुरा

ये बोझ दिल से उतर अच्छा।


 
 
 

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